लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाने के लिए तीन प्रमुख पहलों पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आम आदमी को अपने काम के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकना पड़े, यह व्यवस्था की विफलता है। लोकसेवकों के काम का वास्तविक आकलन नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं और समस्याओं के समयबद्ध समाधान से होना चाहिए। इसी दिशा में अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता, उपलब्धियों और बेहतर कामकाज को वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
मिशन कर्मयोगी के तहत तीन प्रमुख पहल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आयोजित ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने, पंचायतों और नगर निकायों के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने तथा सही पद पर योग्य व्यक्ति की तैनाती सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उपाम और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि शामिल हुए।
‘ऑफिस-ऑफिस’ जैसी परेशानी से आम आदमी को मिले मुक्ति
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी बुजुर्ग को पेंशन के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ें या किसी जरूरतमंद को समय पर समाधान न मिले, तो लोक सेवा का उद्देश्य पूरा नहीं होता। उन्होंने ‘ऑफिस-ऑफिस’ धारावाहिक का उल्लेख करते हुए कहा कि सामान्य काम के लिए नागरिकों का एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकना पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करता है। समस्याओं को जानबूझकर लंबित रखना और जानकारी के अभाव में उनका समाधान नहीं कर पाना, दोनों ही गंभीर स्थितियां हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिम्मेदार पद पर किसी अयोग्य व्यक्ति का बैठना जितना खतरनाक है, उतना ही नुकसानदेह किसी लापरवाह व्यक्ति का उस पद पर बने रहना भी है। कई कर्मचारी अपने अधिकारों और पदोन्नति को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाते। ऐसे में कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने, उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट करने और उनके काम का नियमित मूल्यांकन करने की जरूरत है। किसी बुजुर्ग, युवा, महिला, किसान या जरूरतमंद को समय पर राहत मिलना ही प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उपाम में बनेगा एआई उत्कृष्टता केंद्र
मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से आग्रह किया कि उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने के लिए उपाम को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने में सहयोग दिया जाए। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आंकड़ों के विश्लेषण और डिजिटल तकनीक से शासन की कार्यप्रणाली तेजी से बदल रही है। ऐसे में लोकसेवकों को नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करना जरूरी है। तकनीक निर्णय प्रक्रिया को तेज और सरल बना सकती है, लेकिन प्रशासन को संवेदनशील बनाने के लिए सेवा भाव आवश्यक है।
पंचायतों और नगर निकायों के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
योगी आदित्यनाथ ने ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगमों में कार्यरत कर्मचारियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्थानीय निकायों को मजबूत, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाना जरूरी है। पंचायतें और नगर निकाय शासन की बुनियादी इकाइयां हैं। इनकी कार्यक्षमता बेहतर होने से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
एसीआर और प्रमोशन में कार्य प्रदर्शन को मिलेगी अहमियत
मुख्यमंत्री ने ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ यानी सही जिम्मेदारी के लिए सही व्यक्ति की अवधारणा को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने क्षमता विकास आयोग से उपाम के साथ मिलकर अधिकारियों और कर्मचारियों की उपलब्धियों, कार्य प्रदर्शन और बेहतर कार्यों के उदाहरणों को उनकी वार्षिक गोपनीय आख्या तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। इससे कर्मचारियों की योग्यता के अनुरूप जिम्मेदारियां तय करने और उपयुक्त व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने में मदद मिलेगी।
यूपी के 19.26 लाख से अधिक कर्मचारी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी लोक सेवा की कार्यसंस्कृति बदलने का राष्ट्रीय अभियान है। उत्तर प्रदेश के 19.26 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अब तक लगभग चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। प्रदेश के 334 से अधिक प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की सफलता का आकलन केवल पंजीकरण और पाठ्यक्रमों की संख्या से नहीं किया जा सकता। असली सवाल यह है कि प्रशिक्षण के बाद फैसले कितने बेहतर हुए, सरकारी प्रक्रियाएं कितनी सरल बनीं और आम नागरिक को कितनी अच्छी सेवाएं मिलीं।
डिग्री और नियुक्ति पत्र से ही कोई अधिकारी दक्ष नहीं बनता
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने एक सड़क को दो लेन से चार लेन करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभियंताओं ने सड़क को जमीन से करीब तीन मीटर ऊंचा बना दिया। इससे आसपास की घनी आबादी के लोगों का आवागमन बाधित होने लगा। शिकायत मिलने पर वह स्वयं मौके पर पहुंचे और सड़क को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल निर्माण कार्य का नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ और नागरिकों की जरूरतों को पहचानने की क्षमता का था। डिग्री हासिल कर लेना या नियुक्ति पत्र मिल जाना किसी को अपने आप दक्ष अभियंता अथवा सक्षम अधिकारी नहीं बना देता। इसके लिए नई तकनीक अपनाने, परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने और जिम्मेदारियों को समझने की क्षमता विकसित करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सोच के तहत क्षमता विकास आयोग की स्थापना और उपाम को आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत महसूस हुई।
36 क्षेत्रीय नीतियों के जरिए कार्यसंस्कृति बदलने का दावा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने नीतिगत ठहराव से बाहर निकलते हुए विभिन्न क्षेत्रों के लिए 36 क्षेत्रीय नीतियां तैयार की हैं। इस बदलाव में क्षमता विकास और मिशन कर्मयोगी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्नति पोर्टल प्रशिक्षण संस्थानों को अपने अनुभव, विशेषज्ञता और बेहतर कार्यपद्धतियां साझा करने का अवसर देता है। इससे विभिन्न संस्थान एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकते हैं और बेहतर कार्यसंस्कृति विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए केवल अच्छी नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने वाला सक्षम, संवेदनशील और परिणाम देने वाला प्रशासन भी जरूरी है। नागरिकों की परेशानियां कम हों और उन्हें समय पर समाधान मिले, तभी लोक सेवा सार्थक होगी।
2017 से पहले की व्यवस्था पर योगी का निशाना
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। यहां उपजाऊ भूमि, पर्याप्त जल संसाधन और बड़ी युवा कार्यशक्ति जैसी संभावनाएं मौजूद थीं, लेकिन लंबे समय तक प्रदेश विपन्नता और अराजकता से जूझता रहा। उनके मुताबिक, संभावनाओं को उपलब्धियों में बदलने के लिए जरूरी क्षमता विकास और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी रही। शासन व्यवस्था नागरिक केंद्रित होने के बजाय सत्ता केंद्रित हो गई थी और आम आदमी का व्यवस्था से भरोसा कमजोर पड़ने लगा था।
उन्होंने कहा कि उस दौर में सरकारी नौकरी के विज्ञापन जारी होने पर युवाओं को चयन प्रक्रिया में सिफारिश और लेनदेन की आशंका सताती थी। उन्हें पारदर्शी तरीके से नियुक्ति मिलने का भरोसा नहीं था।
साढ़े नौ साल में अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे में बदलाव का दावा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, बजट और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता मिली है। उनके मुताबिक, वर्ष 2017 में प्रदेश के पास करीब डेढ़ एक्सप्रेसवे थे, जबकि अब देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। उन्होंने सड़क, रेल और हवाई संपर्क के क्षेत्र में प्रदेश की प्रगति का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश की पहली रैपिड रेल संचालित है और सात शहरों में मेट्रो सेवाएं चल रही हैं।
उन्होंने बताया कि इस अवधि में 65 लाख गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराए गए, तीन करोड़ से अधिक परिवारों के घरों में शौचालय बनाए गए और 15 करोड़ से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक ईमानदारी से पहुंचा और इस दौरान प्रदेश में भूख से किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई।
उन्होंने बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में हर घर नल योजना, सभी 75 जिलों में बिजली की उपलब्धता, कृषि विकास दर आठ प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने और गन्ना किसानों को नियमित भुगतान को भी प्रदेश में हुए बदलाव के उदाहरणों के रूप में पेश किया।
इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण के लिए कई विभागों को जोड़ा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन तब विफल होता है, जब विभाग अपनी जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डाल देते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में इंसेफेलाइटिस से बच्चों की मौतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इस समस्या को केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित मानकर देखा गया। कई मामलों में मौतों को अज्ञात बीमारी बताकर दूसरे विभाग अपनी जिम्मेदारी से अलग हो जाते थे।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 1998 से 2017 तक सांसद रहते हुए उन्होंने इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया कि इंसेफेलाइटिस से निपटने के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। अभियान में नगर विकास, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, दिव्यांगजन कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग को भी शामिल किया गया।
उन्होंने बताया कि आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पैरामेडिकल स्टाफ, बाल रोग विशेषज्ञों, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और 108 एंबुलेंस सेवा की जिम्मेदारियां तय की गईं और उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, चार दशकों में इंसेफेलाइटिस से लगभग 50 हजार बच्चों की मौत हुई थी, लेकिन विभागीय समन्वय और क्षमता विकास के जरिए इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण हासिल किया गया है और अब प्रदेश में इससे होने वाली मौतों की संख्या शून्य है।
उन्होंने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि किसी बड़ी समस्या का समाधान केवल एक विभाग के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। स्पष्ट जिम्मेदारी, प्रशिक्षित कर्मचारी और लगातार निगरानी से प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
कार्यशाला में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान, उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल, आयोग की सदस्य डॉ. अलका मित्तल, सचिव जगदीप गुप्ता और उपाम के महानिदेशक एम. देवराज सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
